भारत एक ऐसा देश है, जहां लोग पारंपरिक रूप से अरेंज मैरिज की संस्कृति का पालन करते हैं, एक ऐसी प्रथा जिसका पालन हर भारतीय समुदाय द्वारा किया जाता है, चाहे वह किसी भी धर्म, जाति और वर्ग का हो। पुराने दिनों में दो परिवार शादी का फैसला करते थे और आमतौर पर जोड़ों की शादी उनकी पसंद के अनुसार की जाती थी। भारत में 28 राज्य और 9 केंद्र शासित प्रदेश हैं और हर राज्य में अलग-अलग तरह के विवाह समारोह होते हैं। विवाह पंजीकरण के प्रकार: हिंदू विवाह अधिनियम, 1955: वैदिक रीति-रिवाजों और तीन मुख्य अनुष्ठानों का पालन करें अर्थात कन्यादान (जिसका अर्थ है दुल्हन का पिता उसे विदा करना), पाणिग्रहण (अर्थात् आग के सामने दूल्हे और दुल्हन के हाथ मिलाना) और सप्तपदी (मतलब) आग के चारों ओर सात फेरे लगाना) का पालन किया जाता है। लेकिन कुछ समुदाय अलग-अलग रीति-रिवाजों का पालन कर रहे हैं। निम्नलिखित धर्म के दो लोगों यानी हिंदू, बौद्ध, जैन या सिख के बीच सभी विवाह हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 या विशेष विवाह अधिनियम, 1954 के तहत पंजीकृत हैं। विशेष विवाह अधिनियम, 1954: सभी प्रकार के अंतर्जातीय और अंतर-धार्मिक विवाह विशेष विवाह अध...
Legal notes, E-Books and all posts relative to law and knowledge. lawyer thinking. Judiciary preparation.