विधि मुख्य रूप से 2 प्रकार की होती है। सिविल और आपराधिक विधि, विधि को लेकर हमेशा हमारे मन में कई सवाल उत्पन्न होते रहते है।
अतः हम यहां पर विस्तार से समझेंगे की सिविल और आपराधिक विधि में क्या अंतर है। :-
# सिविल विधि (civil Law)#
1.इसे दीवानी विधि भी कहा जाता है।
2.यह विधि नागरिक अधिकारों की सुरक्षा हेतु बनाई गई है।
3.इस विधि का प्रयोग मुख्य रूप से नागरिकों को सभ्य बनाने के लिए किया जाता है।
4.इस विधि में मुख्य रूप से निम्न श्रेणी के आपराधिक कार्य शामिल किए गए हैं।
5.इस विधि के अंतर्गत होने वाले आपराधिक कार्यों से सामान्यतया कोई व्यक्ति विशेष ही प्रभावित होता है।
6.इस विधि के अंतर्गत नुकसानी के लिए वाद लाया जाता है अर्थात अपराधी को अर्थ दंड देते हुए उससे प्रतिकर वसूला जाता है।
7.इस विधि में 2 पक्ष होते हैं:- वादी, प्रतिवादी
प्रतिवादी वह व्यक्ति होता है जिसके द्वारा क्षति पहुंचाई जाती है या कोई अवैध कार्य किया जाता है।
वादी वह व्यक्ति होता है जो क्षति पहुंचने के कारण पीड़ित होता है अतः वादी द्वारा प्रतिवादी पर मामला दर्ज किया जाता है।
8.इस विधि के अंतर्गत मामला सिविल अर्थात दीवानी न्यायालय (civil court)में दर्ज किया जाता है।
#आपराधिक विधि(Criminal Law)#
1.इसे फौजदारी विधि भी कहा जाता है।
2.इस विधि के अंतर्गत गंभीर व उच्च श्रेणी के अपराध आते है।
3.इस विधि के अंतर्गत करित किए जाने वाले अपराध से पूरा समाज व राज्य प्रभावित होता है।
4.इस विधि के अंतर्गत अपराधी को कठोर सजा व दंड दिया जाता है जैसे:- अर्थदंड, कारावास ,आजीवन कारावास, मृत्युदंड इत्यादि
5.इस विधि में 2 पक्ष होते हैं अभियुक्त पक्ष अभियोजन पक्ष अभियुक्त पक्ष वह पक्ष होता है जिसके द्वारा अपराध कारित किया जाता है अभियोजन पक्ष वह होता है जो अपराध से पीड़ित होता है अतः अभियुक्त पक्ष पर अभियोजन पक्ष द्वारा मामला दर्ज किया जाता है।
6.इस विधि के अंतर्गत मामला सत्र न्यायालय(Session court) या मजिस्ट्रेट के न्यायालय में दर्ज किया जाता है।
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