जैसे-जैसे हमारा देश तरक्की कर रहा है वैसे-वैसे हमारे देश में कई तरह के अपराध भी दिनों दिन बढ़ते जा रहे हैं और इन अपराधों पर नियंत्रण पाने और देश में कानून और व्यवस्था को कायम रखने का ज़िम्मा हमारे कानून में पुलिस प्रशासन को सौंपा गया है अतः कोई भी अपराध होने के पश्चात पुलिस का यह कर्तव्य है कि वह संबंधित अपराध की F.I.R अविलंब दर्ज करें अतः इस प्रक्रिया को हम अपने इस लेख में समझेंगे
किसी आपराधिक घटना के संबंध में पुलिस के पास कार्रवाई के लिए दर्ज की गई सूचना को प्राथमिक सूचना रिपोर्ट (F.I.R)कहा जाता है प्राथमिक सूचना रिपोर्ट एक लिखित प्रपत्र होता है जो पुलिस द्वारा किसी संगेय अपराध की सूचना प्राप्त होने पर तैयार किया जाता है यह सूचना प्राय अपराध के शिकार व्यक्ति द्वारा पुलिस के पास एक शिकायत के रूप में दर्ज की जाती है किसी अपराध के बारे में पुलिस को कोई भी व्यक्ति मौखिक या लिखित रूप में सूचित कर सकता है किंतु कई बार सामान्य लोगों द्वारा दी गई सूचना को पुलिस प्राथमिकी के रूप में दर्ज नहीं करती है ऐसे में प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए कई व्यक्तियों को न्यायालय का भी सहारा लेना पड़ता है। दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 154 के तहत F.I.R की प्रक्रिया पूरी की जाती है यह वह महत्वपूर्ण सूचनात्मक दस्तावेज होता है जिसके आधार पर पुलिस कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ाती है
कब दर्ज होती है F.I.R :-
FIR संगेय अपराधो (ऐसे अपराध जिसमें गिरफ्तारी के लिए पुलिस को किसी वारंट की जरूरत नहीं होती है।) मे ही दर्ज होती है इसके बाद पुलिस को अधिकार होता है कि वह आरोपी व्यक्ति को गिरफ्तार करें और जांच पड़ताल करें अगर अपराध संगेय नहीं है तो उसकी F.I.R नहीं लिखी जाती है ऐसी स्थिति में बिना कोर्ट की इजाजत के कार्रवाई नहीं हो पाती है।
अगर पुलिस F.I.R दर्ज न करे तो इसकी शिकायत उसके वरिष्ठ अधिकारी यानी कि S.P को की जा सकती है।
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