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जनवरी, 2022 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

भारतीय दण्ड संहिता 1860 हिंदी महत्वपूर्ण नोट्स E-Book

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भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 क्या है? आइए जानते हैं।

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 प्राण एवं दैहिक स्वतंत्रता का अधिकार प्रदान करता है। संपूर्ण संविधान का सार अनुच्छेद 21 में निहित है यह व्यक्ति की प्राण और दैहिक स्वतंत्रता को संरक्षण प्रदान करता है संवैधानिक फलों का उपभोग मानव रूप में देह करती है अतः देह की स्वतंत्रता एवं उसका संरक्षण महत्वपूर्ण है यदि देह सुरक्षित एवं संरक्षित नहीं है तो विधि,विधान अधिकार और उपचार व्यर्थ है राज्य का भी यह प्रथम कर्तव्य है कि वह अपने नागरिकों के शरीर एवं संपत्ति की रक्षा करें अनुच्छेद 21 में यह कहा गया है कि "किसी भी व्यक्ति को उसके प्राण या दैहिक स्वतंत्रता से विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अधीन ही वंचित किया जा सकेगा अन्यथा नहीं। 1.गरिमा युक्त जीवन जीने का अधिकार  2.लावारिस मृतकों का दाह संस्कार 3.संतान पैदा करने या न करने के विकल्प का अधिकार  4.भिखारियों का पुनर्वास  5.धूम्रपान पर रोक 6.रैगिंग पर रोक  7.जानने का अधिकार(Right to information) 8.जीवन का आनंद पूर्वक उपयोग उपभोग करने का अधिकार 9.निशुल्क खाद्य सामग्री पाने का अधिकार  10.शिक्षा का अधिकार  11.चिकित्सा का अधिकार...

विवाह पंजीकरण (Marriage Registration) कैसे करें? जानिए आवश्यक दस्तावेज़, शुल्क और प्रक्रिया

  विवाह पंजीकरण का उद्देश्य (Purpose of Registration of Marriage) पंजीकरण का उद्देश्य शादी को आधिकारिक रूप से मान्य करना और भविष्य में कुछ ग़लत होने पर पति और पत्नी दोनों को सामाजिक और कानूनी सुरक्षा प्रदान करना है। एक विवाह प्रमाण पत्र, जो आपकी शादी के पंजीकृत होने के बाद ही जारी किया जाएगा, भविष्य के सभी संयुक्त उपक्रमों में आवश्यक है, जैसे कि देश में एक साथ घर खरीदना या जीवनसाथी के लिए आवेदन करना यदि आप विदेश यात्रा करने का निर्णय लेते है। भारत में, विवाह के पंजीकरण के क्षेत्र को नियंत्रित करने वाले निम्नलिखित दो कानून हैं: 1.हिन्दू विवाह अधिनियम, 1955 हिंदू विवाह अधिनियम 1955 विवाह पंजीकरण को नियंत्रित करता है जहां पति और पत्नी दोनों हिंदू, बौद्ध, जैन या सिख हैं, या उन्होंने इन धर्मों में से एक। ऐन धर्मांतरण किया हो। यह याद रखना चाहिए कि हिंदू विवाह अधिनियम केवल उन विवाहों पर लागू होता है जो पहले हो चुके हैं। 2.विशेष विवाह अधिनियम, 1954 विशेष विवाह अधिनियम 1954 एक धर्मनिरपेक्ष कानून है और सभी धर्म के व्यक्तियों पर लागू होता है। इस अधिनियम के तहत किसी भी धर्म का कोई भी व्यक्ति प...

पुलिस वारंट के बिना कब किसी को गिरफ्तार कर सकती है आइए जानते हैं क्या है इसके कानूनी प्रावधान

 यह समझने से पहले हमे ये जानना जरूरी है कि गिरफ्तारी क्या होती है एवं कितने प्रकार कि होती है। पुलिस द्वारा जब किसी व्यक्ति को अपने अधिकार में अथवा कब्जे में ले लिया जाता है तो उसे गिरफ्तारी कहा जाता है। गिरफ्तारी का कानूनी अर्थ भी यही है इस दृष्टि से आवश्यक नहीं कि पुलिस ही वरन् एक सामान्य नागरिक भी किसी संगेय अथवा ऐसे अपराध के अपराधी को जो अजमानतीय है अपने अधिकार अथवा कब्जे में ले सकता है।  गिरफ्तारी दो प्रकार की होती है। 1. वारंट के साथ गिरफ्तारी (असंगेेय मामले) 2. बिना वारंट के गिरफ्तारी (संगेेय मामले) अतः यहां पर हम बिना वारंट के गिरफ्तारी के बारे में समझेंगे दंड प्रक्रिया संहिता के अध्याय 5 और धारा 41 में बिना वारंट के संगेेय मामलों के बारे में व्यक्तियों कि गिरफ्तारी के प्रावधान किए गए है। धारा 41.(1) कोई पुलिस अधिकारी मजिस्ट्रेट के आदेश के बिना और वारण्ट के बिना किसी ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकता है :- (क) जो पुलिस अधिकारी की उपस्थिति में संज्ञेय अपराध करता है; (ख) जिसके विरुद्ध इस बारे में उचित परिवाद किया जा चुका है या विश्वसनीय इत्तिला प्राप्त हो चुकी है या उचित ...