सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

जानिए क्या होता है संविधान

संविधान क्या है?

संविधान देश की सर्वोच्च विधि होती है जिससे पूरा देश शासित होता है। यह एक पवित्र दस्तावेज है, जिसे परिभाषाओं की सीमा में नहीं बाँधा जा सकता है। इसे
देश की सर्वोत्तम, सर्वोच्च एवं आधारभूत विधि कहा जा सकता है। यही वह दस्तावेज है जो राज्य के
समस्त अंगों (विधायिका, कार्यपालिका एवं न्यायपालिका) को शक्तियाँ प्रदान करता है। इन तीनों अंगों
को संविधान की मर्यादाओं में रह कर अपने कर्त्तव्यों का निर्वहन करना होता है। इसे आसानी से बदला
भी नहीं जा सकता।
प्रोफेसर ए० वी० डायसी के अनुसार-
"किसी समाज की सरकार का प्ररूप अथवा ढाँचा ही उस समाज एवं सरकार का
संविधान होता है। संविधान ही राज्य अथवा राजनीतिक समाज में शक्तियों के वितरण का
विनिश्चय करता है और सम्प्रभु शक्ति का प्रयोग करता है।"
वेड और फिलिप्स ने संविधान की परिभाषा देते हुए कहा है-
"संविधान एक विशेष वैधानिक मान्यता, विश्वसनीयता एवं पवित्रता लिये हुए ऐसा
दस्तावेज होता है जो राज्य की सरकार के अंगों के प्रमुख कार्यों का ढाँचा तैयार करता है
और इन अंगों की कार्य-प्रणाली के सिद्धान्तों का निर्धारण करता है।'
डॉ० भीमराव अम्बेडकर ने संविधान की सुन्दरतम परिभाषा की है। उनके अनुसार-
"संविधान एक मौलिक दस्तावेज है। यह एक ऐसा दस्तावेज है जो राज्य के तीनों अंगों अर्थात्- विधायिका, कार्यपालिका एवं न्यायपालिका की स्थिति एवं शक्तियों को स्पष्ट
करता है। यह केवल राज्य के अंगों का सृजन ही नहीं करता अपितु उनके प्राधिकार को
परिसीमित करते हुए उन्हें निरंकुश एवं तानाशाह होने से रोकता है।"
इन सभी परिभाषाओं का मिला-जुला प्रभाव यह है कि-
(i) संविधान एक मौलिक दस्तावेज होता है।
(ii) इसे देश की सर्वोच्च एवं सर्वोत्तम विधि माना जाता है।
(iii) यह एक विशेष वैधानिक मान्यता, विश्वसनीयता एवं पवित्रता लिये होता है।
(iv) यह राज्य के विभिन्न अंगों का सृजन करता है।
(v) यह विभिन्न अंगों की शक्तियों का निर्धारण करता है।
(vi) यह राज्य के अंगों के प्राधिकार को मर्यादित कर उन्हें निरंकुश एवं तानाशाह होने से
रोकता है।
(vii) यह सरकार के सभी अंगों की कार्य-प्रणाली के सिद्धान्तों को विनिशि्चित करता है।
(viii) यह सम्प्रभु शक्ति का प्रयोग करता है।
(ix) इसे आसानी से नहीं बदला जा सकता है।
अन्त में यह कहा जा सकता है कि "संविधान देश की जनता की आशाओं एवं आकांक्षाओं
का पुञ्ज होता है।"

संविधान क्या है

मेरे अनुसार:-

संविधान एक वह सर्वोच्च विधि है जिसके द्वारा किसी देश की शासन व्यवस्था को सुनियोजित एवं सुनिश्चित ढंग से चलाया जाता हो



टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

राजस्थान काश्तकारी अधिनियम 1955 धारा 53 (Rajasthan tenancy act 1955 sec. 53)

आइए जानते हैं क्या है राजस्थान काश्तकारी अधिनियम 1955 की धारा 53             Watch now video

अधिनियम (Act)क्या होता है।

                        सामान्यतया यह देखा जाता है कि सरकार नये नियम व कानून बनाने व उन्हें लागू करने के लिए अधिनियम पारित करती है। और इन अधिनियमों को सरकार अपने शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा जारी करके जनता में लागू करती है। - तो आईये जानते है कि क्या होता है अधिनियम-                        # अधिनियम (Act)# वे विधि-विधान अथवा कानून जो समाज के सुचारू रूप से संचालन के लिए राज्य के द्वारा गठित किए जाते हैं। प्रजातांत्रिक पद्धति के अंतर्गत इन का गठन प्रजा द्वारा निर्वाचित सदस्यों के उन समूहों के द्वारा होता है जो इस कार्य हेतु उस पद्धति के अंतर्गत अधिकृत होते हैं। भारतीय संविधान में अधिनियमो के गठन का कार्य संसद और विधानसभाओं को सौंपा गया है। - संसद सिर्फ उन्हीं विषयों पर अधिनियम बना सकती है जो केंद्रीय सूची में वर्णित है। - विधानसभा उन्हीं विषयों पर अधिनियम बना सकती है जो राज्य सूची में वर्णित है।

विवाह पंजीकरण (Marriage Registration) कैसे करें? जानिए आवश्यक दस्तावेज़, शुल्क और प्रक्रिया

  विवाह पंजीकरण का उद्देश्य (Purpose of Registration of Marriage) पंजीकरण का उद्देश्य शादी को आधिकारिक रूप से मान्य करना और भविष्य में कुछ ग़लत होने पर पति और पत्नी दोनों को सामाजिक और कानूनी सुरक्षा प्रदान करना है। एक विवाह प्रमाण पत्र, जो आपकी शादी के पंजीकृत होने के बाद ही जारी किया जाएगा, भविष्य के सभी संयुक्त उपक्रमों में आवश्यक है, जैसे कि देश में एक साथ घर खरीदना या जीवनसाथी के लिए आवेदन करना यदि आप विदेश यात्रा करने का निर्णय लेते है। भारत में, विवाह के पंजीकरण के क्षेत्र को नियंत्रित करने वाले निम्नलिखित दो कानून हैं: 1.हिन्दू विवाह अधिनियम, 1955 हिंदू विवाह अधिनियम 1955 विवाह पंजीकरण को नियंत्रित करता है जहां पति और पत्नी दोनों हिंदू, बौद्ध, जैन या सिख हैं, या उन्होंने इन धर्मों में से एक। ऐन धर्मांतरण किया हो। यह याद रखना चाहिए कि हिंदू विवाह अधिनियम केवल उन विवाहों पर लागू होता है जो पहले हो चुके हैं। 2.विशेष विवाह अधिनियम, 1954 विशेष विवाह अधिनियम 1954 एक धर्मनिरपेक्ष कानून है और सभी धर्म के व्यक्तियों पर लागू होता है। इस अधिनियम के तहत किसी भी धर्म का कोई भी व्यक्ति प...