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दिसंबर, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

जानिए क्या है महिला अधिकार

देश भर में नारी उत्थान (महिला अधिकार) की बात बड़े ही जोर-शोर से उठाई जा रही है। लेकिन देश की अधिकांश महिलाओं को सही मायनों में उनके मौलिक अधिकारों अथवा संवैधानिक अधिकारों की जानकारी ना के बराबर है। आइये जानते हैं कि भारतीय संविधान के अनुसार भारतीय महिलाओं को क्या-क्या हक प्रदान किये गए हैं। -  प्रत्येक नागरिक को समानता का अधिकार दिया गया है। समानता का मतलब । 'समानता', इसमें किसी प्रकार का लिंग भेद नहीं है। समानता, स्वतन्त्रता और न्याय का अधिकार महिला-पुरुष दोनों को समान रूप से दिया गया है। शारीरिक और मानसिक तौर पर नर-नारी में किसी प्रकार का भेदभाव असंवैधानिक माना गया है। हालांकि आवश्यकता महसूस होने पर महिलाओं और पुरुषों का वर्गीकरण किया जा सकता है। अनुच्छेद-15 में यह प्रावधान किया गया है कि स्वतंत्रता-समानता और न्याय के साथ-साथ महिलाओं लड़कियों की सुरक्षा और संरक्षण का काम भी सरकार का कर्त्तव्य है। जैसे बिहार में लड़कियों के लिए साइकिल और पोशाक की योजना, मध्यप्रदेश में लड़कियों के लिए 'लाडली लक्ष्मी' योजना, दिल्ली में मेट्रो में महिलाओं के लिए रिजर्व कोच की व्यवस्था आद...

यदि कोई बच्चा उड़ते हुए विमान में पैदा होता है तो उसका जन्म स्थान और नागरिकता क्या होगी ? आईए जानते है।

उड़ते विमान में जन्म लेने वाले बच्चों की नागरिकता और जन्म स्थान क्या होगा इस मामले पर अलग-अलग देशों की अपनी-अपनी नीतियां हैं. साथ ही कई एयरलाइनों में उड़ान के माध्यम से यात्रा करने वाली गर्भवती महिलाओं के लिए विशिष्ट दिशानिर्देश भी हैं.  बच्चे की नागरिकता और जन्म स्थान क्या होगा? आइये जानते हैं? आइये एक उदाहरण से समझते हैं: एक गर्भवती महिला भारत से अमेरिका के लिए उड़ान भरती है. किसी दूसरे देश की सीमा से गुजरते समय उसे प्रसव पीड़ा होने लगती  है और वह विमान में ही एक बच्चे को जन्म देती है. तो इस केस में बच्चे का जन्म स्थान क्या माना जाएगा और उसकी नागरिकता क्या होगी? बच्चे का जन्म स्थान वह देश माना जाएगा, जिस देश से गुजरते वक्त बच्चे का जन्म हुआ है या फिर वह बच्चा अपने माता-पिता के देश की नागरिकता भी प्राप्त कर सकता है. हालांकि, भारत में दोहरी नागरिकता का कोई प्रावधान नहीं है. यहीं आपक को बता दें कि विमान में जन्म लेने वाले बच्चों की नागरिकता को लेकर हर देश में अलग-अलग नियम हैं. भारतीय कानून क्या कहता है? आइये एक और उदाहरण देखते हैं. यदि बांग्लादेश से अमेरिका जाने वाला विमान भारती...

परिवाद क्या है ? आईए जानते हैं।

 यदि कोई व्यक्ति अपराध करता है, तो उसके विरुद्ध एफ०आई०आर० दर्ज कराई जाती है, परिस्थितिवश एफ०आई०आर० दर्ज न होने की दशा में हर व्यक्ति को यह अधिकार है कि वह मजिस्ट्रेट के यहां परिवाद अथवा इस्तगासा दाखिल कर सके। परिवाद के माध्यम से व्यक्ति अपराधी के विरुद्ध कार्यवाही करवा सकता है, वही परिवाद के सामान्य अर्थों में आता है। परिवाद की परिभाषा सी०आर०पी०सी० की धारा-2 में दी गई है। परिवाद को लिखित एवं मौखिक दोनों प्रकार से दर्ज करवाया जा सकता है। यह भी आवश्यक नहीं कि अपराध का नामजद परिवाद दायर किया जाए। परिवाद को अज्ञात अपराधों के विरुद्ध भी दर्ज करवाया जा सकता है। सी०आर०पी०सी० की धारा 200 के तहत मजिस्ट्रेट इस्तगासे पर कार्यवाही करता है परिवाद का संक्षिप्त विचारण सी०आर०पी०सी० की धारा 260 या महानगर मजिस्ट्रेट और चीफ जूडिशियल मजिस्ट्रेट के यहां किया जाता है। यदि मजिस्ट्रेट को कार्यवाही करने का कोई कारण नहीं मिलता, तो वह उसे खारिज भी कर सकता है। किन्तु यदि मजिस्ट्रेट की जानकारी में आता है कि परिवाद से सम्बन्धित अपराध की जांच पुलिस कर रही है, तो वह पुलिस अधिकारी से इस विषय में रिपोर्ट मांगेगा। व...

दंड न्यायालय और उनके कार्य

  सेशन न्यायालय के अलावा हर राज्य में निम्नलिखित प्रकार के दण्ड न्यायालयों की व्यवस्था की गई है 1. सेशन न्यायालय- (अ) प्रत्येक राज्य में सेशन खण्ड होंगे। प्रत्येक सेशन खंड एक जिला होगा। लेकिन महानगर क्षेत्र होने पर उसमें अलग ही सेशन खण्ड अथवा जिला होगा। (ब) राज्य सरकार उच्च न्यायालय से सलाह के बाद जिलों की सीमाओं व संख्या में परिवर्तन कर सकती है। (स) राज्य सरकार उच्च न्यायालय से विचार विमर्श के बाद जिले को उपखण्डों में विभाजित कर सकती है और ऐसे उपखण्डों की संख्याओं व सीमाओं में परिवर्तन कर सकती है। (द) दण्ड प्रक्रिया संहिता (सन् 1973) के आरंभ के समय जो सेशन खण्ड मौजूद थे वह जिले और उपखण्ड के अधीन बनाए गए समझे जाएंगे। उपरोक्त आधार पर प्रत्येक जिले में एक सेशन अदालत होती है। सेशन न्यायालय या सेशन जज मृत्युदण्ड तक की सजा प्रदान कर सकता है। लेकिन इस फैसले से उच्च न्यायालय का सहमत होना जरूरी है। जबकि सहायक सेशन जज द्वारा मृत्युदण्ड, आजीवन कारावास और दस वर्ष से अधिक की सजा जैसे दण्ड नहीं दिए जा सकते हैं। ऐसा सी०आर०पी०सी० की धारा 28 के प्रावधान अनुसार है • प्रत्येक सेशन न्यायालय में एक न्...

The preliminary examination for direct recruitment to the cadre of civil judge 2021

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