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संदेश

धारा 437 Cr.PC के अंतर्गत अजमानतीय अपराध में जमानत कैसे लेे आईए जानते है।

 (1) जब कोई व्यक्ति, जिस पर अजमानतीय अपराध का अभियोग है या जिस पर यह संदेह है कि उसने अजमानतीय अपराध किया है, पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी द्वारा वारण्ट के बिना गिरफ्तार या निरुद्ध किया जाता है या उच्च न्यायालय अथवा सेशन न्यायालय से भिन्न न्यायालय के समक्ष हाजिर होता है या लाया जाता है तब वह जमानत पर छोड़ा जा सकता है किन्तु-- (i) यदि यह विश्वास करने के लिए उचित आधार प्रतीत होते हैं कि ऐसा व्यक्ति मृत्यु या आजीवन कारावास से दण्डनीय अपराध का दोषी है तो वह इस प्रकार नहीं छोड़ा जाएगा; (ii) यदि ऐसा अपराध कोई संज्ञेय अपराध है और ऐसा व्यक्ति मृत्यु, आजीवन कारावास या सात वर्ष या उससे अधिक के कारावास से दण्डनीय किसी अपराध के लिए पहले दोषसिद्ध किया गया है, या वह तीन वर्ष या उससे अधिक के, किन्तु सात वर्ष से अनधिक की अवधि के कारावास से दंडनीय किसी संज्ञेय अपराध के लिए दो या अधिक अवसरों पर पहले दोषसिद्ध किया गया है तो वह इस प्रकार नहीं छोड़ा जाएगा । परन्तु न्यायालय यह निदेश दे सकेगा कि खण्ड (i) या खण्ड (ii) में निर्दिष्ट व्यक्ति जमानत पर छोड़ दिया जाए यदि ऐसा व्यक्ति सोलह वर्ष से कम आयु का है ...

कोर्ट मैरिज कैसे करे ? जानिए प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेज

भारत एक ऐसा देश है, जहां लोग पारंपरिक रूप से अरेंज मैरिज की संस्कृति का पालन करते हैं, एक ऐसी प्रथा जिसका पालन हर भारतीय समुदाय द्वारा किया जाता है, चाहे वह किसी भी धर्म, जाति और वर्ग का हो। पुराने दिनों में दो परिवार शादी का फैसला करते थे और आमतौर पर जोड़ों की शादी उनकी पसंद के अनुसार की जाती थी। भारत में 28 राज्य और 9 केंद्र शासित प्रदेश हैं और हर राज्य में अलग-अलग तरह के विवाह समारोह होते हैं। विवाह पंजीकरण के प्रकार: हिंदू विवाह अधिनियम, 1955: वैदिक रीति-रिवाजों और तीन मुख्य अनुष्ठानों का पालन करें अर्थात कन्यादान (जिसका अर्थ है दुल्हन का पिता उसे विदा करना), पाणिग्रहण (अर्थात् आग के सामने दूल्हे और दुल्हन के हाथ मिलाना) और सप्तपदी (मतलब) आग के चारों ओर सात फेरे लगाना) का पालन किया जाता है। लेकिन कुछ समुदाय अलग-अलग रीति-रिवाजों का पालन कर रहे हैं। निम्नलिखित धर्म के दो लोगों यानी हिंदू, बौद्ध, जैन या सिख के बीच सभी विवाह हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 या विशेष विवाह अधिनियम, 1954 के तहत पंजीकृत हैं। विशेष विवाह अधिनियम, 1954: सभी प्रकार के अंतर्जातीय और अंतर-धार्मिक विवाह विशेष विवाह अध...

चेक बाउंस हो जाये तो क्या करे ? जाने पूरी कानूनी प्रक्रिया

चेक बाउंस होना अपराध है। परक्राम्य लिखत अधिनियम (नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881) की धारा 138 में जुर्माना लगाया जा सकता है जो चेक की राशि का दोगुना या दो साल से अधिक की अवधि के लिए कारावास या दोनों तक हो सकता है। जब भुगतानकर्ता/धारक बैंक को भुगतान के लिए एक चेक प्रस्तुत करता है और अपर्याप्त धनराशि के ज्ञापन के साथ बैंक द्वारा बिना भुगतान किए चेक वापस कर दिया जाता है “इसे चेक बाउंस होना कहा जाता है। ऐसे मामले में, चेक का प्राप्तकर्ता/धारक, बैंक से डाक के माध्यम से प्राप्त सूचना के 30 दिनों के भीतर, जिसमें चेक राशि का भुगतान करने की मांग करता है, एडवोकेट के माध्यम से एक वैधानिक कानूनी मांग नोटिस जारीकर्ता/जारीकर्ता को लिखित रूप में जारी कर सकता है। वैधानिक कानूनी मांग नोटिस जारी होने के बाद, प्राप्तकर्ता/धारक को वैधानिक कानूनी मांग नोटिस की प्राप्ति से 15 दिन का समय जारीकर्ता को देना होगा। यदि आहर्ता/जारीकर्ता ने 15 दिनों की समयावधि समाप्त होने के बाद भी चेक राशि का भुगतान नहीं किया है, तो प्राप्तकर्ता/धारक द्वारा 15 दिनों की समाप्ति के बाद 30 दिनों के भीतर भुगतानकर्ता/जारीकर्ता के ...

भारतीय दण्ड संहिता 1860 हिंदी महत्वपूर्ण नोट्स E-Book

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भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 क्या है? आइए जानते हैं।

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 प्राण एवं दैहिक स्वतंत्रता का अधिकार प्रदान करता है। संपूर्ण संविधान का सार अनुच्छेद 21 में निहित है यह व्यक्ति की प्राण और दैहिक स्वतंत्रता को संरक्षण प्रदान करता है संवैधानिक फलों का उपभोग मानव रूप में देह करती है अतः देह की स्वतंत्रता एवं उसका संरक्षण महत्वपूर्ण है यदि देह सुरक्षित एवं संरक्षित नहीं है तो विधि,विधान अधिकार और उपचार व्यर्थ है राज्य का भी यह प्रथम कर्तव्य है कि वह अपने नागरिकों के शरीर एवं संपत्ति की रक्षा करें अनुच्छेद 21 में यह कहा गया है कि "किसी भी व्यक्ति को उसके प्राण या दैहिक स्वतंत्रता से विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अधीन ही वंचित किया जा सकेगा अन्यथा नहीं। 1.गरिमा युक्त जीवन जीने का अधिकार  2.लावारिस मृतकों का दाह संस्कार 3.संतान पैदा करने या न करने के विकल्प का अधिकार  4.भिखारियों का पुनर्वास  5.धूम्रपान पर रोक 6.रैगिंग पर रोक  7.जानने का अधिकार(Right to information) 8.जीवन का आनंद पूर्वक उपयोग उपभोग करने का अधिकार 9.निशुल्क खाद्य सामग्री पाने का अधिकार  10.शिक्षा का अधिकार  11.चिकित्सा का अधिकार...

विवाह पंजीकरण (Marriage Registration) कैसे करें? जानिए आवश्यक दस्तावेज़, शुल्क और प्रक्रिया

  विवाह पंजीकरण का उद्देश्य (Purpose of Registration of Marriage) पंजीकरण का उद्देश्य शादी को आधिकारिक रूप से मान्य करना और भविष्य में कुछ ग़लत होने पर पति और पत्नी दोनों को सामाजिक और कानूनी सुरक्षा प्रदान करना है। एक विवाह प्रमाण पत्र, जो आपकी शादी के पंजीकृत होने के बाद ही जारी किया जाएगा, भविष्य के सभी संयुक्त उपक्रमों में आवश्यक है, जैसे कि देश में एक साथ घर खरीदना या जीवनसाथी के लिए आवेदन करना यदि आप विदेश यात्रा करने का निर्णय लेते है। भारत में, विवाह के पंजीकरण के क्षेत्र को नियंत्रित करने वाले निम्नलिखित दो कानून हैं: 1.हिन्दू विवाह अधिनियम, 1955 हिंदू विवाह अधिनियम 1955 विवाह पंजीकरण को नियंत्रित करता है जहां पति और पत्नी दोनों हिंदू, बौद्ध, जैन या सिख हैं, या उन्होंने इन धर्मों में से एक। ऐन धर्मांतरण किया हो। यह याद रखना चाहिए कि हिंदू विवाह अधिनियम केवल उन विवाहों पर लागू होता है जो पहले हो चुके हैं। 2.विशेष विवाह अधिनियम, 1954 विशेष विवाह अधिनियम 1954 एक धर्मनिरपेक्ष कानून है और सभी धर्म के व्यक्तियों पर लागू होता है। इस अधिनियम के तहत किसी भी धर्म का कोई भी व्यक्ति प...

पुलिस वारंट के बिना कब किसी को गिरफ्तार कर सकती है आइए जानते हैं क्या है इसके कानूनी प्रावधान

 यह समझने से पहले हमे ये जानना जरूरी है कि गिरफ्तारी क्या होती है एवं कितने प्रकार कि होती है। पुलिस द्वारा जब किसी व्यक्ति को अपने अधिकार में अथवा कब्जे में ले लिया जाता है तो उसे गिरफ्तारी कहा जाता है। गिरफ्तारी का कानूनी अर्थ भी यही है इस दृष्टि से आवश्यक नहीं कि पुलिस ही वरन् एक सामान्य नागरिक भी किसी संगेय अथवा ऐसे अपराध के अपराधी को जो अजमानतीय है अपने अधिकार अथवा कब्जे में ले सकता है।  गिरफ्तारी दो प्रकार की होती है। 1. वारंट के साथ गिरफ्तारी (असंगेेय मामले) 2. बिना वारंट के गिरफ्तारी (संगेेय मामले) अतः यहां पर हम बिना वारंट के गिरफ्तारी के बारे में समझेंगे दंड प्रक्रिया संहिता के अध्याय 5 और धारा 41 में बिना वारंट के संगेेय मामलों के बारे में व्यक्तियों कि गिरफ्तारी के प्रावधान किए गए है। धारा 41.(1) कोई पुलिस अधिकारी मजिस्ट्रेट के आदेश के बिना और वारण्ट के बिना किसी ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकता है :- (क) जो पुलिस अधिकारी की उपस्थिति में संज्ञेय अपराध करता है; (ख) जिसके विरुद्ध इस बारे में उचित परिवाद किया जा चुका है या विश्वसनीय इत्तिला प्राप्त हो चुकी है या उचित ...

जानिए क्या है महिला अधिकार

देश भर में नारी उत्थान (महिला अधिकार) की बात बड़े ही जोर-शोर से उठाई जा रही है। लेकिन देश की अधिकांश महिलाओं को सही मायनों में उनके मौलिक अधिकारों अथवा संवैधानिक अधिकारों की जानकारी ना के बराबर है। आइये जानते हैं कि भारतीय संविधान के अनुसार भारतीय महिलाओं को क्या-क्या हक प्रदान किये गए हैं। -  प्रत्येक नागरिक को समानता का अधिकार दिया गया है। समानता का मतलब । 'समानता', इसमें किसी प्रकार का लिंग भेद नहीं है। समानता, स्वतन्त्रता और न्याय का अधिकार महिला-पुरुष दोनों को समान रूप से दिया गया है। शारीरिक और मानसिक तौर पर नर-नारी में किसी प्रकार का भेदभाव असंवैधानिक माना गया है। हालांकि आवश्यकता महसूस होने पर महिलाओं और पुरुषों का वर्गीकरण किया जा सकता है। अनुच्छेद-15 में यह प्रावधान किया गया है कि स्वतंत्रता-समानता और न्याय के साथ-साथ महिलाओं लड़कियों की सुरक्षा और संरक्षण का काम भी सरकार का कर्त्तव्य है। जैसे बिहार में लड़कियों के लिए साइकिल और पोशाक की योजना, मध्यप्रदेश में लड़कियों के लिए 'लाडली लक्ष्मी' योजना, दिल्ली में मेट्रो में महिलाओं के लिए रिजर्व कोच की व्यवस्था आद...

यदि कोई बच्चा उड़ते हुए विमान में पैदा होता है तो उसका जन्म स्थान और नागरिकता क्या होगी ? आईए जानते है।

उड़ते विमान में जन्म लेने वाले बच्चों की नागरिकता और जन्म स्थान क्या होगा इस मामले पर अलग-अलग देशों की अपनी-अपनी नीतियां हैं. साथ ही कई एयरलाइनों में उड़ान के माध्यम से यात्रा करने वाली गर्भवती महिलाओं के लिए विशिष्ट दिशानिर्देश भी हैं.  बच्चे की नागरिकता और जन्म स्थान क्या होगा? आइये जानते हैं? आइये एक उदाहरण से समझते हैं: एक गर्भवती महिला भारत से अमेरिका के लिए उड़ान भरती है. किसी दूसरे देश की सीमा से गुजरते समय उसे प्रसव पीड़ा होने लगती  है और वह विमान में ही एक बच्चे को जन्म देती है. तो इस केस में बच्चे का जन्म स्थान क्या माना जाएगा और उसकी नागरिकता क्या होगी? बच्चे का जन्म स्थान वह देश माना जाएगा, जिस देश से गुजरते वक्त बच्चे का जन्म हुआ है या फिर वह बच्चा अपने माता-पिता के देश की नागरिकता भी प्राप्त कर सकता है. हालांकि, भारत में दोहरी नागरिकता का कोई प्रावधान नहीं है. यहीं आपक को बता दें कि विमान में जन्म लेने वाले बच्चों की नागरिकता को लेकर हर देश में अलग-अलग नियम हैं. भारतीय कानून क्या कहता है? आइये एक और उदाहरण देखते हैं. यदि बांग्लादेश से अमेरिका जाने वाला विमान भारती...

परिवाद क्या है ? आईए जानते हैं।

 यदि कोई व्यक्ति अपराध करता है, तो उसके विरुद्ध एफ०आई०आर० दर्ज कराई जाती है, परिस्थितिवश एफ०आई०आर० दर्ज न होने की दशा में हर व्यक्ति को यह अधिकार है कि वह मजिस्ट्रेट के यहां परिवाद अथवा इस्तगासा दाखिल कर सके। परिवाद के माध्यम से व्यक्ति अपराधी के विरुद्ध कार्यवाही करवा सकता है, वही परिवाद के सामान्य अर्थों में आता है। परिवाद की परिभाषा सी०आर०पी०सी० की धारा-2 में दी गई है। परिवाद को लिखित एवं मौखिक दोनों प्रकार से दर्ज करवाया जा सकता है। यह भी आवश्यक नहीं कि अपराध का नामजद परिवाद दायर किया जाए। परिवाद को अज्ञात अपराधों के विरुद्ध भी दर्ज करवाया जा सकता है। सी०आर०पी०सी० की धारा 200 के तहत मजिस्ट्रेट इस्तगासे पर कार्यवाही करता है परिवाद का संक्षिप्त विचारण सी०आर०पी०सी० की धारा 260 या महानगर मजिस्ट्रेट और चीफ जूडिशियल मजिस्ट्रेट के यहां किया जाता है। यदि मजिस्ट्रेट को कार्यवाही करने का कोई कारण नहीं मिलता, तो वह उसे खारिज भी कर सकता है। किन्तु यदि मजिस्ट्रेट की जानकारी में आता है कि परिवाद से सम्बन्धित अपराध की जांच पुलिस कर रही है, तो वह पुलिस अधिकारी से इस विषय में रिपोर्ट मांगेगा। व...