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जानिए क्या है महिला अधिकार

देश भर में नारी उत्थान (महिला अधिकार) की बात बड़े ही जोर-शोर से उठाई जा रही है। लेकिन देश की अधिकांश महिलाओं को सही मायनों में उनके मौलिक अधिकारों अथवा संवैधानिक अधिकारों की जानकारी ना के बराबर है। आइये जानते हैं कि भारतीय संविधान के अनुसार भारतीय महिलाओं को क्या-क्या हक प्रदान किये गए हैं। -  प्रत्येक नागरिक को समानता का अधिकार दिया गया है। समानता का मतलब । 'समानता', इसमें किसी प्रकार का लिंग भेद नहीं है। समानता, स्वतन्त्रता और न्याय का अधिकार महिला-पुरुष दोनों को समान रूप से दिया गया है। शारीरिक और मानसिक तौर पर नर-नारी में किसी प्रकार का भेदभाव असंवैधानिक माना गया है। हालांकि आवश्यकता महसूस होने पर महिलाओं और पुरुषों का वर्गीकरण किया जा सकता है। अनुच्छेद-15 में यह प्रावधान किया गया है कि स्वतंत्रता-समानता और न्याय के साथ-साथ महिलाओं लड़कियों की सुरक्षा और संरक्षण का काम भी सरकार का कर्त्तव्य है। जैसे बिहार में लड़कियों के लिए साइकिल और पोशाक की योजना, मध्यप्रदेश में लड़कियों के लिए 'लाडली लक्ष्मी' योजना, दिल्ली में मेट्रो में महिलाओं के लिए रिजर्व कोच की व्यवस्था आद...

यदि कोई बच्चा उड़ते हुए विमान में पैदा होता है तो उसका जन्म स्थान और नागरिकता क्या होगी ? आईए जानते है।

उड़ते विमान में जन्म लेने वाले बच्चों की नागरिकता और जन्म स्थान क्या होगा इस मामले पर अलग-अलग देशों की अपनी-अपनी नीतियां हैं. साथ ही कई एयरलाइनों में उड़ान के माध्यम से यात्रा करने वाली गर्भवती महिलाओं के लिए विशिष्ट दिशानिर्देश भी हैं.  बच्चे की नागरिकता और जन्म स्थान क्या होगा? आइये जानते हैं? आइये एक उदाहरण से समझते हैं: एक गर्भवती महिला भारत से अमेरिका के लिए उड़ान भरती है. किसी दूसरे देश की सीमा से गुजरते समय उसे प्रसव पीड़ा होने लगती  है और वह विमान में ही एक बच्चे को जन्म देती है. तो इस केस में बच्चे का जन्म स्थान क्या माना जाएगा और उसकी नागरिकता क्या होगी? बच्चे का जन्म स्थान वह देश माना जाएगा, जिस देश से गुजरते वक्त बच्चे का जन्म हुआ है या फिर वह बच्चा अपने माता-पिता के देश की नागरिकता भी प्राप्त कर सकता है. हालांकि, भारत में दोहरी नागरिकता का कोई प्रावधान नहीं है. यहीं आपक को बता दें कि विमान में जन्म लेने वाले बच्चों की नागरिकता को लेकर हर देश में अलग-अलग नियम हैं. भारतीय कानून क्या कहता है? आइये एक और उदाहरण देखते हैं. यदि बांग्लादेश से अमेरिका जाने वाला विमान भारती...

परिवाद क्या है ? आईए जानते हैं।

 यदि कोई व्यक्ति अपराध करता है, तो उसके विरुद्ध एफ०आई०आर० दर्ज कराई जाती है, परिस्थितिवश एफ०आई०आर० दर्ज न होने की दशा में हर व्यक्ति को यह अधिकार है कि वह मजिस्ट्रेट के यहां परिवाद अथवा इस्तगासा दाखिल कर सके। परिवाद के माध्यम से व्यक्ति अपराधी के विरुद्ध कार्यवाही करवा सकता है, वही परिवाद के सामान्य अर्थों में आता है। परिवाद की परिभाषा सी०आर०पी०सी० की धारा-2 में दी गई है। परिवाद को लिखित एवं मौखिक दोनों प्रकार से दर्ज करवाया जा सकता है। यह भी आवश्यक नहीं कि अपराध का नामजद परिवाद दायर किया जाए। परिवाद को अज्ञात अपराधों के विरुद्ध भी दर्ज करवाया जा सकता है। सी०आर०पी०सी० की धारा 200 के तहत मजिस्ट्रेट इस्तगासे पर कार्यवाही करता है परिवाद का संक्षिप्त विचारण सी०आर०पी०सी० की धारा 260 या महानगर मजिस्ट्रेट और चीफ जूडिशियल मजिस्ट्रेट के यहां किया जाता है। यदि मजिस्ट्रेट को कार्यवाही करने का कोई कारण नहीं मिलता, तो वह उसे खारिज भी कर सकता है। किन्तु यदि मजिस्ट्रेट की जानकारी में आता है कि परिवाद से सम्बन्धित अपराध की जांच पुलिस कर रही है, तो वह पुलिस अधिकारी से इस विषय में रिपोर्ट मांगेगा। व...

दंड न्यायालय और उनके कार्य

  सेशन न्यायालय के अलावा हर राज्य में निम्नलिखित प्रकार के दण्ड न्यायालयों की व्यवस्था की गई है 1. सेशन न्यायालय- (अ) प्रत्येक राज्य में सेशन खण्ड होंगे। प्रत्येक सेशन खंड एक जिला होगा। लेकिन महानगर क्षेत्र होने पर उसमें अलग ही सेशन खण्ड अथवा जिला होगा। (ब) राज्य सरकार उच्च न्यायालय से सलाह के बाद जिलों की सीमाओं व संख्या में परिवर्तन कर सकती है। (स) राज्य सरकार उच्च न्यायालय से विचार विमर्श के बाद जिले को उपखण्डों में विभाजित कर सकती है और ऐसे उपखण्डों की संख्याओं व सीमाओं में परिवर्तन कर सकती है। (द) दण्ड प्रक्रिया संहिता (सन् 1973) के आरंभ के समय जो सेशन खण्ड मौजूद थे वह जिले और उपखण्ड के अधीन बनाए गए समझे जाएंगे। उपरोक्त आधार पर प्रत्येक जिले में एक सेशन अदालत होती है। सेशन न्यायालय या सेशन जज मृत्युदण्ड तक की सजा प्रदान कर सकता है। लेकिन इस फैसले से उच्च न्यायालय का सहमत होना जरूरी है। जबकि सहायक सेशन जज द्वारा मृत्युदण्ड, आजीवन कारावास और दस वर्ष से अधिक की सजा जैसे दण्ड नहीं दिए जा सकते हैं। ऐसा सी०आर०पी०सी० की धारा 28 के प्रावधान अनुसार है • प्रत्येक सेशन न्यायालय में एक न्...

The preliminary examination for direct recruitment to the cadre of civil judge 2021

  Examination held on 28 November 2021 from 2:00 Pm to 4:00 Pm Rajasthan Judicial Service preliminary examination 2021  Download paper with solution. according to rajasthan high court answer key Click on button to download the paper Download now click on 3 dots click on download

भारत का संविधान (Handwritten notes in hindi)

हम आपको यहां पर भारतीय संविधान की हस्तलिखित eBook उपलब्ध करवा रहे है। यह eBook सभी प्रकार की प्रतियोगी परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है। इसमे कुल 395 अनुच्छेद को शामिल किया गया है। इसमें कुल 162 पेज है। यह eBook हम आपको बिल्कुल ही कम मूल्य पर उपलब्ध करवा रहे है। अतः आप इस eBook को यहां से खरीदकर अपनी तैयारी को मजबूत करे eBook Demo देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें https://drive.google.com/file/d/1-JmJu8IKKCrtupi5JB8GIwbnUCoM41cQ/view?usp=drivesdk eBook खरीदने के लिए यहां क्लिक करे Buy now

भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872,भारतीय दण्ड संहिता 1860,भारतीय संविधान एवं मानवाधिकार eBook

 हम यहां पर अपने पाठकों के लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872,भारतीय दण्ड संहिता 1860,भारतीय संविधान एवं मानवाधिकार की eBook प्रस्तुत कर रहे है। यह eBook न्यायिक सेवा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है इस eBook में परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण 400+ बहुवैकल्पिक प्रश्नोत्तरो को समाहित किया गया है। जिसमें से 280 प्रश्नोत्तर भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872 के 43 प्रश्नोत्तर भारतीय दण्ड संहिता 1860 के 80 प्रश्नोत्तर भारतीय संविधान के एवं 41 प्रश्नोत्तर मानवाधिकारों से संबंधित है। हम यह eBook आपको बिल्कुल ही कम मूल्य 50 रुपए में उपलब्ध करवा रहे है। इस eBook का Demo देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें https://drive.google.com/file/d/1-E3ydr4l2rLJLIzHp4YJ1Pp7FsrAkmQ9/view?usp=drivesdk इस eBook को खरीदने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें https://imojo.in/g56Qmf

क्या है पुलिस F.I.R

जैसे-जैसे हमारा देश तरक्की कर रहा है वैसे-वैसे हमारे देश में कई तरह के अपराध भी दिनों दिन बढ़ते जा रहे हैं और इन अपराधों पर नियंत्रण पाने और देश में कानून और व्यवस्था को कायम रखने का ज़िम्मा हमारे कानून में पुलिस प्रशासन को सौंपा गया है अतः कोई भी अपराध होने के पश्चात पुलिस का यह कर्तव्य है कि वह संबंधित अपराध की F.I.R अविलंब दर्ज करें अतः इस प्रक्रिया को हम अपने इस लेख में समझेंगे किसी आपराधिक घटना के संबंध में पुलिस के पास कार्रवाई के लिए दर्ज की गई सूचना को प्राथमिक सूचना रिपोर्ट (F.I.R)कहा जाता है प्राथमिक सूचना रिपोर्ट एक लिखित प्रपत्र होता है जो पुलिस द्वारा किसी संगेय अपराध की सूचना प्राप्त होने पर तैयार किया जाता है यह सूचना प्राय अपराध के शिकार व्यक्ति द्वारा पुलिस के पास एक शिकायत के रूप में दर्ज की जाती है किसी अपराध के बारे में पुलिस को कोई भी व्यक्ति मौखिक या लिखित रूप में सूचित कर सकता है किंतु कई बार सामान्य लोगों द्वारा दी गई सूचना को पुलिस प्राथमिकी के रूप में दर्ज नहीं करती है ऐसे में प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए कई व्यक्तियों को न्यायालय का भी सहारा लेना पड़ता है। दंड...

भारतीय नागरिक के कानूनी अधिकारों को जाने

   -: कानून प्रदत्त अधिकारों को जानें :- भारत सरकार ने देश के प्रत्येक नागरिक को कानूनी रूप से अनेक अधिकार दिए हैं जिनकी जानकारी होना आवश्यक है। नीचे कुछ महत्वपूर्ण कानूनी अधिकारों की जानकारी दी जा रही है- (1) भारतीय कानून में नागरिक को सम्मानपूर्वक जीवन निर्वाह का अधिकार है। प्रत्येक नागरिक को बिना किसी भेदभाव के समान रूप से कानूनी संरक्षण प्रदान किया गया है। प्रत्येक नागरिक को आजीविका कमाने का अधिकार है। (2) कानून में प्रत्येक नागरिक को न्यायालय में अपना पक्ष प्रस्तुत करने का अधिकार प्रदान किया गया है। (3) कानूनी सहायता के (विधिक हकदार) नागरिकों को अपनी सुरक्षा के लिए निःशुल्क वकील की सेवाएं सरकारी खर्च पर प्राप्त करने का अधिकार है। (4) अपने साथ हुए जुल्म, अन्याय और अधिकार समाप्ति के विरुद्ध व्यक्ति को पुलिस में एफ०आई०आर० दर्ज करवाने का कानूनी अधिकार है। (5) लोकहित से जुड़े मामलों के लिए कोई भी व्यक्ति उच्चतम न्यायालय में अपनी शिकायत लिखित रूप में डाक से प्रेषित कर सकता है। (6) सार्वजनिक स्थानों पर अवरोध के विरुद्ध व्यक्ति कार्यकारी मजिस्ट्रेट व जिला मजिस्ट्रेट के पास परिवेदन दर्ज कर...

जानिए क्या होता है संविधान

संविधान क्या है? संविधान देश की सर्वोच्च विधि होती है जिससे पूरा देश शासित होता है। यह एक पवित्र दस्तावेज है, जिसे परिभाषाओं की सीमा में नहीं बाँधा जा सकता है। इसे देश की सर्वोत्तम, सर्वोच्च एवं आधारभूत विधि कहा जा सकता है। यही वह दस्तावेज है जो राज्य के समस्त अंगों (विधायिका, कार्यपालिका एवं न्यायपालिका) को शक्तियाँ प्रदान करता है। इन तीनों अंगों को संविधान की मर्यादाओं में रह कर अपने कर्त्तव्यों का निर्वहन करना होता है। इसे आसानी से बदला भी नहीं जा सकता। प्रोफेसर ए० वी० डायसी के अनुसार- "किसी समाज की सरकार का प्ररूप अथवा ढाँचा ही उस समाज एवं सरकार का संविधान होता है। संविधान ही राज्य अथवा राजनीतिक समाज में शक्तियों के वितरण का विनिश्चय करता है और सम्प्रभु शक्ति का प्रयोग करता है।" वेड और फिलिप्स ने संविधान की परिभाषा देते हुए कहा है- "संविधान एक विशेष वैधानिक मान्यता, विश्वसनीयता एवं पवित्रता लिये हुए ऐसा दस्तावेज होता है जो राज्य की सरकार के अंगों के प्रमुख कार्यों का ढाँचा तैयार करता है और इन अंगों की कार्य-प्रणाली के सिद्धान्तों का निर्धारण करता है।' डॉ० भीमराव ...